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    Published On : Sun, Jan 10th, 2021

    खनिकर्म महामंडल के रिजर्व घाट से रेत चोरी

    – उच्च स्तरीय जांच सह दोषियों पर कड़क कार्रवाई हेतु विभागीय आयुक्त को निवेदन सौंपा शहबाज सिद्दीकी ने


    नागपुर/चंद्रपुर – राज्य के खनिकर्म महामंडल के लिए चंद्रपुर जिले के 4 रेती घाट आरक्षित किये गए थे ताकि यहां की रेती से MREGS अंतर्गत कुँए और घरकुल योजनाओं की जरूरत पूर्ति की जा सके। नियमों को ताक पर रख के रेती घाटों का टेंडर निकाल खुले बाजार में बेचने का आरोप लगाया गया।इस संदर्भ में युवा जागरूक नागरिक शहबाज़ सिद्दीकी ने कल शुक्रवार को विभागीय आयुक्त का ध्यानाकर्षण करवाते हुए उच्च स्तरीय जांच सह दोषियों पर कड़क कार्रवाई मांग की।

    शहबाज़ के अनुसार खनिकर्म महामंडल ने चंद्रपुर जिले के चिंचगांव,हरदा-3,बोरधा, अन्हेरीनवरगांव(चिखलधोकड़ा-2) रेत घाट सरकारी प्रकल्पों के लिए आरक्षित किया था। शासन निर्णय के हिसाब से इन घाटों की रेती की नीलामी करने के पूर्व राज्य सरकार से अनुमति लेनी अनिवार्य की गई थी,या फिर सरकारी प्रकल्पों के लिए खनिकर्म महामंडल या फिर संबंधित ग्रामपंचायत के मार्फत उत्खनन करने का नियम होने के बावजूद नियमों को ताक पर रख चारों घाटों की निलामी की गई।

    निलामी हेतु नियम-शर्तो के हिसाब से नदी से रेती निकाल कर तय STOCK क्षेत्र में जमा करना था। नदी से STOCK तक रेती लाने के लिए दिखाए गए ट्रैक्टरों का RTO में पंजीयन कृषि उपयोग दर्शाया गया,जबकि कमर्शियल होना चाहिए था। चारों घाटों के लिए लगभग 200 ट्रैक्टरों का उपयोग दर्शाया गया। लेकिन इन ट्रैक्टरों में रेत भरने वाले मजदूरों का कोई सूची नहीं, न ही उनके मासिक वेतन,PF, ESIC का कोई अतापता,महामंडल की नीति पर पहला ज्वलंत सवाल हिचकोले खा रही।

    Bodadha

    Halada-3

    सिद्दीकी ने बताया कि उक्त सभी घाटों के निकट लगभग 500 मीटर की दूरी पर STOCK जमा करने के लिए स्थान तय किया गया था। नदी से रेत निकालकर STOCK तक लाने के लिए 45 मिनट और आसपास की रॉयल्टी निकाली गई थी। मगर उक्त ट्रैक्टरों की आवाजाही 13 से 39 किलोमीटर की दर्ज की गई याने घाट से रेती उठने के बाद STOCK पर नहीं पहुंची अर्थात रेत सीधे घाट से भरकर बाहर ही बाहर बेच दिया गया या फिर ज्यादा दूरी दर्शाकर महामंडल से ज्यादा पैसे उठा लिए गए। नियमानुसार 3 किलोमीटर तक रेती पहुंचाने के लिए महामंडल 2100 रुपए और इससे अधिक दूरी के लिए अतिरिक्त भुगतान कर रही थी।

    उदाहरण के रूप में चिंचगांव रेत घाट से ट्रेक्टर क्रमांक MH34-AP2749 में रेती 1.02 बजे भरी गई और 1.47 बजे खाली की गई तो यहीं ट्रेक्टर दूसरे घाट में 1.12 बजे रेत भरी गई और 1.57 बजे खाली की गई,यह कैसे संभव हो सकता हैं।ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं.

    Chichgaon

    Arhenavargaon Chikhaldhokada 2

    महा माइनिंग के हिसाब से रिजर्व STOCK खत्म हो चुका हैं। इसके बावजूद STOCK में रेत बड़ी मात्रा में जमा हैं,क्या यह अवैध उत्खनन की गई रेती हैं ? या फिर बोगस ट्रेक्टर दर्शाया गया।

    किसी भी रॉयल्टी का एक ही बार उपयोग किया जा सकता हैं।जबकि महा माइनिंग को 1 ही रॉयल्टी से अवैध फेरियां लगाने की जानकारी मिली लेकिन उन्होंने राज्य के राजस्व विभाग को इसकी सूचना नहीं दी। महा माइनिंग एप्प का निर्माण अवैध रेती उत्खनन और चोरियां रोकने के लिए किया गया था। रेत कब वैध उत्खनन करने वाले अपने गाड़ियों का यहां पंजीयन करवाते हैं, जिससे रॉयल्टी जारी होंवे के बाद GPS सिस्टम के आधार पर उन गाड़ियों का सम्पूर्ण लोकशन महा माइनिंग एप्प में रिकॉर्ड हो जाता हैं।

    उक्त सभी रेत घाटों पर एक ही समय में 1 ही ट्रेक्टर का पंजीयन समझ से परे हैं। रेत उत्खनन करने के लिए सेक्शन पाइप का उपयोग किया गया। ENVOIREMENT CLEARANCE वर्ष 2019 के लिए उक्त घाटों को मिला था लेकिन आजतक 2021 में भी उसका उपयोग EXTENSION की आड़ में शुरू हैं। सिद्दीकी की मांग हैं कि उक्त सभी रेती घाटों के STOCK जप्त की जाए। सभी चारों घाटों का लेखा-जोखा की सूक्ष्म जांच हो और दोषियों पर कड़क कानूनी कार्रवाई की जाए।

    उल्लेखनीय यह हैं कि तब चंद्रपुर जिले के जो खनन अधिकारी थे,वे फिलहाल नागपुर जिले के खनन अधिकारी हैं। खनिकर्म महामंडल ने नागपुर जिले के 6 महत्वपूर्ण रेती घाट की मांग की थी,जिसका सिरे से उक्त खनन अधिकारी ने विरोध दर्ज करवाया हैं क्योंकि उन्हें चंद्रपुर की घटना का प्रत्यक्ष अनुभव हैं।

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