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    Published On : Sat, Jan 9th, 2021
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    NMC किसके इशारे पर चल रही CM या MVA सुप्रीमो ?

    मनपा का मूल जिम्मेदारी थम गई,आयुक्त बतला रहे FUND CRISIS

    नागपुर: उक्त सवाल आज इसलिए आम जनता के मध्य गर्मागरम चर्चा का विषय बना हुआ हैं.वह इसलिए कि पिछले एक साल से सम्पूर्ण शहर में मुलभुत विकासकार्य रोक दी गई,फिर अतिमहत्वपूर्ण कार्य क्यों न हो.इस सन्दर्भ में मनपायुक्त राधाकृष्णन बी से समय-समय पर केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी,जिले के पालकमंत्री नितिन राऊत,शहर विकास मंत्री,गृह मंत्री के परिवहन मंत्री ने जनहितार्थ विभिन्न मुद्दों पर निर्देश/सलाह दिए लेकिन मनपायुक्त के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा।इससे अब जनता यह निष्कर्ष पर पहुंची कि शायद मनपायुक्त सिर्फ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे या फिर महाविकास आघाडी प्रमुख शरद पवार का ही निर्देश का पालन कर रहे !

    सवाल यह भी हैं कि आयुक्त अगर उक्त दोनों शीर्ष नेताओं के निर्देशों का पालन कर रहे तो क्या उक्त दोनों नेताओं को जनता से ज्यादा मनपा में सत्ताधारी भाजपा की फ़िक्र सता रही ? अगर ऐसा हैं तो यह धर्मनिरपेक्षता के विरोध में हैं,ऐसा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
    दूसरी ओर अगर सचमुच मनपा पिछले एक साल से आर्थिक तंगी की दौर से गुजर रही तो उसकी वजह तलाशने के लिए मनपा बर्खास्त कर उच्च स्तरीय जाँच समिति के हवाले कर दिया जाना चाहिए।

    कोंग्रेसियों का मानना हैं कि मनपायुक्त के उक्त रवैय्ये से MVA (महाविकास आघाडी) के स्वास्थ्य पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।आयुक्त के रवैय्ये से जनता में यह संदेशा जा रहा कि मनपा की वर्षों से सत्ताधारी ने अनाप-शनाप मनपा निधि को अनावश्यक रूप से खर्च किए,नतीजा मनपा प्रशासन की देनदारी करोड़ों में बढ़ गई और MVA द्वारा मनपा कर्मियों के लिए 7 वां वेतन आयोग के सिफारिश अनुसार वेतन देने के निर्देश देने के बावजूद मनपायुक्त द्वारा हाथ खड़े करने का भी मुख्य वजह यहीं हैं कि इन दिनों मनपा काफी ‘कड़की’ में हैं ?

    मनपायुक्त की गुगली से MVA चित
    पिछले कुछ दिनों से मनपा के खिलाफ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और MVA सुप्रीमो शरद पवार को उनके ट्विटर द्वारा नागपुर के नागरिकों द्वारा मनपा की सूरत ए हाल बताने की मुहिम की शुरुआत हुई.इसी बीच 7 जनवरी को नए महापौर दयाशंकर तिवारी ने मनपायुक्त से मधुर संबंध होने की जानकारी दी,इसके बाद 8 जनवरी को उन्होंने आयुक्त को पत्र लिख मनपा में 7 वां वेतन आयोग लागु करने का निर्देश/गुजारिश करते ही कल ही आयुक्त के निर्देश पर मनपा वित्त विभाग प्रमुख ने सम्बंधित आदेश जारी कर महापौर तिवारी के पहल को मान दिया।इसके पूर्व कांग्रेस यह दावा कर रहे थे कि उनके पालकमंत्री ने मुख्यमंत्री के कह कर 7 वां वेतन आयोग अनुसार मनपा कर्मियों को वेतन दिलवाने में अहम् भूमिका निभाई।लेकिन तब से यह मामला मनपा आयुक्त के पास अटका हुआ था.इस दरम्यान मनपा CAFO ने मनपा के कुछ विभाग प्रमुखों को 100% बकाया वसूली के बाद 7 वां वेतन आयोग के अनुसार कर्मियों को वेतन देने का आश्वासन लिखित रूप से दिया था कि कल अचानक आयुक्त ने CAFO को निर्देश देकर जनवरी 2021 से 7 वां वेतन आयोग की सिफारिश अनुसार वेतन देने संबंधी अध्यादेश जारी किया। आयुक्त की ‘गुगली’ से भाजपा में ख़ुशी की लहर तो राज्य की सत्ताधारी पक्षों में मायूसी छा गई क्यूंकि उक्त मामले की सम्पूर्ण क्रेडिट ‘महापौर दयाशंकर तिवारी’ ले गए.
    नागपुर मनपा की प्रमुख समस्याएं

    1- वर्ष 2020 नागपुर मनपा के लिए काफी अड़चनों भरा रहा.वर्ष के पहले माह के अंत में MVA ने नागपुर मनपा में सत्ताधारी भाजपाई को परेशान करने के लिए विवादास्पद IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को बतौर आयुक्त भेज दिए,इसके बाद मार्च से दीपावली तक कोरोना का भीषण आतंक रहा,जिसका भरपूर फायदा उठाते हुए मुंढे ने किये कुछ नहीं सिर्फ सम्पूर्ण विकास कार्य रोक एकसूत्री कार्यक्रम के तहत सिर्फ और सिर्फ खुद की पीठ थपथपाई।MVA के मनसूबे भी पूरा न करने के काऱण MVA ने मजबूरन उनका तबादला कर घर बैठा दिया।इन्होने नाना प्रकार के अड़ंगे डाल मनपा का वर्ष 20-21 का बजट भी पेश नहीं होने दी.इसके बाद राधाकृष्णन बी को सरकार ने मुंढे के स्थान पर भेजा। इन्होंने बजट पेश करने दी,उसे प्रशासकीय मंजूरी भी दी लेकिन लागु करने नहीं दिया,यह कहकर कि मनपा आर्थिक तंगी से जूझ रही,700 करोड़ का बकाया देना हैं,इसलिए नए काम करना असंभव हैं.राधाकृष्णन बी ने मुंढे के एक भी निर्देश को रद्द नहीं कर मनपा में सत्ताधारी सह विपक्ष से बराबरी की दुरी बनाए नज़र आए.जबकि वर्त्तमान MVA सरकार ने GST GRANT पहले के बनस्पत बढ़ा भी दिए,एक साल से कोई नया काम नहीं किया गया,वार्षिक बजट लागु नहीं किया गया,बकायेदारों को बकाया नहीं दिया गया.इसके बावजूद FUND CRISIS को सामने कर मनपायुक्त क्या सिद्ध करना चाह रहे यह समझ से परे हैं.

    2- कोरोना की आड़ में कोरोना से बचाव हेतु रोजाना आवाजाही करने वाले लगभग डेढ़ लाख आम नागरिकों को स्वास्थ्य रखते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सहायक साबित होने वाली ‘आपली बस’ को मनपायुक्त ने सिमित कर अन्य-छोटे-छोटे सार्वजानिक परिवहनों को मजबूरन ओवरलोड आवाजाही के लिए छोड़ दिया।मनपा अधीनस्त डीजल बस,CNG और इलेक्ट्रिक बस सभी सड़कों पर नियमित दौड़ते रही तो आम नागरिकों को काफी राहत मिली होती।मनपा के बेड़े में 437 बसें हैं,इनमें से 172 दौड़ रही,शेष कबाड़ का रूप धारण कर ली हैं,क्या सरकारी संपत्ति का नुकसान नहीं।जब ने शहरों की भांति नियमित सार्वजानिक परिवहन सेवा नहीं दी जा सकती तो यह सेवा राज्य परिवहन विभाग से ली क्यों गई,उन्हें लौटा देनी चाहिए। डीजल जैसी ईंधन चोरी और परिवहन खर्च कम करने के उद्देश्य से CNG और इलेक्ट्रिक बसों का प्रयोग किया गया,जिसमें सफलता मिल ही रही थी कि उसे भी रोक दिया गया ( डीजल को CNG बसों में तब्दील करने की प्रक्रिया). केंद्र सरकार द्वारा योजना आयोग के मार्फ़त अनुदानित 100 बस मनपा को प्राप्त हुए,जिसमें से 40 इलेक्ट्रिक बस शुरू करने का कार्यादेश देने के बाद उसे भी रोक दिया जाना,क्या सिद्ध करने की कोशिश की जा रही ?

    3- नियमित कचरा संकलन कर शहर को स्वास्थ्य रख देश में शहर का नाम रोशन करने के बजाय बोगस दो ठेकेदार कंपनी AG ENVIRO और BVG को कचरा संकलन का ठेका लगभग 1 साल पूर्व दिया।दोनों ही कंपनी ने पहले कर्मियों की भर्ती में नौकरियां बेचीं फिर टेंडर की शर्तो अनुसार न मशीन खरीदी और न ही शर्तो के हिसाब से सेवाएं दे रही.नागपुर के लिए लाई गई गाड़ियां जयपुर भेज दी गई.उक्त घटनाक्रम से मनपा प्रशासन भली भांति वाकिफ होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही.वजह साफ़ हैं कि उक्त दोनों ठेकेदार कंपनी ने नीचे से ऊपर तक सभी को खुश कर रखा हैं.ऐसे में शहर का स्वच्छता क्रमांक कभी नहीं सुधरने वाला ?

    4- वर्ष 2020 का सबसे बड़ा घोटाला PWD विभाग का उजागर हुआ.इस विभाग अंतर्गत सीमेंट सड़क फेज – 2 के टेंडर शर्त पूरी न करने के बावजूद टेंडर का वर्कऑर्डर दिया गया फिर समय-समय पर किस्तों में भुगतान भी किया जाता रहा.इसका पर्दाफाश होने के बाद मामला को शांत करने के लिए जाँच समिति गठित की गई,जाँच समिति में ठेकेदार और दोषी अधिकारी को बचाने के लिए सक्रीय अधिकारियों की स्थान दिया गया,जो आज भी लीपापोती करने में लीन हैं.क्या इसे ही स्वच्छ प्रशासन कहा जाता हैं ? जबकि सम्पूर्ण कागजी साबुत प्रशासन को प्राप्त होने के बाद सीधे ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट और सम्बंधित अधिकारी को निलंबित किया जा सकता था.

    5- मनपा अग्निशमन विभाग मनपा की सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक हैं,इसके सतर्क रहने से बेशकीमती जान बचाई जा सकती हैं.लेकिन विडम्बना यह हैं कि इस विभाग के लिए मंजूर कुल पदों में से आधा पद रिक्त हैं,जरुरत पड़ने पर जोनल स्टेशनो को बंद कर सेवाएं देनी पड़ती हैं.

    6- नगर रचना विभाग मनपा को आय देने वाली प्रमुख विभागों में से एक हो सकती हैं.बशर्ते इस विभाग से भ्रष्टाचार 100 % समाप्त हो.एक सादे से नक़्शे के लिए साल-6 माह लग जाते,वह भी 50000 से लाख रूपए खर्च करना पड़ता हैं.नक्शा मंजूर करने के लिए विभाग को TIMEBOND किया गया तो मनपा को काफी लाभ होगा।ऐसा ही कुछ आर्थिक धांधली अग्निशमन विभाग में भी हैं.

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