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    Published On : Fri, Jan 8th, 2021

    चेंबर ने जी.एस.टी. फाइलिंग, आय.टी.सी., ई-वे बिल ब्लाॅकिंग पर जी.एस.टी. विभाग को प्रतिवेदन दिया

    विदर्भ के 13 लाख व्यापारियों की अग्रणी व शीर्ष संस्था नाग विदर्भ चेंबर आॅफ काॅमर्स के अध्यक्ष श्री अश्विन मेहाड़िया के नेतृत्व में चेंबर के पदाधिकारियो ने जी.एस.टी. के अनुपालन में हो रही समस्याओं एवं उनके सुझावों के लिये श्री बलवीर सिंगजी (प्रिंसीपल कमीश्नर, सी.जी.एस.टी., नागपुर झोन -प्) व श्री आर.एस. माहेश्वरी (कमीश्नर, सी.जी.एस.टी., नागपुर झोन -प्प्) को प्रतिवेदन दिया।

    अध्यक्ष श्री अश्विन मेहाड़िया ने श्री बलवीर सिंगजी व श्री आर.एस. माहेश्वरी का दुपट्टा व चेंबर की स्मरिणका ‘अमृत पुष्प’ देकर सम्मान किया।
    श्री अश्विन मेहाड़िया ने प्रतिवेदन द्वारा बताया कि सरकार ने “एक देश – एक कर” हेतु जी.एस.टी. टैक्स लागू किया है, किन्तु अप्रत्यक्ष करों के अंतर्गत विभिन्न टैक्स समाहित होने के कारण “एक देश – एक कर” रूपी जी.एस.टी. को अपने लक्ष्य की प्राप्ती में अनेक कठिनाईया हो रही है।

    जी.एस.टी. के अनुपालन हेतु सरकार एवं जी.एस.टी. विभाग द्वारा प्रावधानों व नियमों में किये गए बदलावों का व्यापारी समुदाय, उत्पादकों, सेवा करदाताओं आदि सभी ने स्वागत किया, किन्तु वर्तमान में भी कुछ प्रावधानों के कारण करदाताओं को जी.एस.टी. के अनुपालन में बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग द्वारा जनवरी 2021 से फत्डच् योजना लागू की जा रही है। विभाग ने इस योजना के तहत करों का भुगतान तिमाही तथा रिर्टन के आधार पर लेना चाहिये।

    चेंबर के उपाध्यक्ष श्री संजय के. अग्रवाल ने कहा कि विभाग द्वारा हाल ही में किये गए बदलावों के अनुसार विभिन्न आधार पर करदाता के जी.एस.टी. रजिस्टेªशन रद्द करने का निर्णय लिया गया है। करदाता द्वारा अनजाने में जी.एस.टी. के रिर्टन फाइल करने या अनुपालन करने में कोई गलती होती है तो उसके लिये उनका रजिस्टेªशन रद्द नहीं किया जाना चाहिये। किसी भी करदाता का छोटी भूल के लिये रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाना अन्यायकारी एवं अहितकारक है।


    चेंबर के उपाध्यक्ष श्री फारूखभाई अकबानी ने कहा कि वर्ष 2018-19 व 2019-20 के जी.एस.टी. के आॅडिट व वार्षिक रिर्टन की अंतिम 31 दिसंबर 2020 है। कोरोना महामारी की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुये, जिसे आगे बढ़ाया जाना चाहिये।

    चेंबर की अप्रत्यक्ष कर समिती के संयोजक सी.ए. रितेश मेहता ने जी.एस.टी. के अनुपालन में होने वाली समस्याओं की विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि करदाता को नए प्रावधान के नियम 86ए के कारण प्ज्ब् का क्लेम करते समय कई परेशानियों सामना करना पड़ता है। अतः विभाग ने प्रावधान में बदलाव कर ईमानदार करदाता को राहत देनी चाहिये। जी.एस.टी. के नये नियम के 86बी के प्रावधान के अनुसार करदाता को कुल करो के भुगतान का 1ः नगद में करना आवश्यक है। करदाता को करों के नगद भुगतान को अपने वहीखातें में एन्ट्री करने में बहुत समस्याएं होगी तथा तरल पूंजी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अतः विभाग ने 1ः नगद के प्रावधान को तुरन्त निरस्त करना चाहिये तथा जिन करदाताओं ने दो माह तक जी.एस.टी. रिर्टन फाइल नहीं किया हो, विभाग द्वारा उनका ई-वे बिल ब्लाॅक नहीं किया जाना चाहिये।

    श्री बलवीर सिंगजी (प्रिंसीपल कमीश्नर, सी.जी.एस.टी., नागपुर झोन -प्) व श्री आर.एस. माहेश्वरी (कमीश्नर, सी.जी.एस.टी., नागपुर झोन -प्प्) ने चेंबर द्वारा दिये गये सुझावों को ध्यान से सुनने के बाद कहा कि विभाग द्वारा जी.एस.टी. के अनुपालन में आने वाली कठिनाईयों को हल करने हेतु उन्हें जी.एस.टी. केन्द्रीय समिती के समक्ष रखकर हल करने का प्रयास किया जायेगा।

    इस अवसर पर चेंबर के सर्वश्री – अध्यक्ष – अश्विन मेहाड़िया, उपाध्यक्ष – अर्जुनदास आहुजा, फारूखभाई अकबानी, संजय के. अग्रवाल, सहसचिव – उमेश पटेल, तथा सी.ए. रितेश मेहता व विधान अग्रवाल उपस्थित थे।
    उपरोक्त प्रेस विज्ञप्ति द्वारा उपाध्यक्ष श्री अर्जुनदास आहुजा ने दी।

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