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    Published On : Sun, Jan 24th, 2021

    नागपुर -सावनेर महामार्ग में यातायात व्यवस्था चरमराई

    – पुलिस प्रशासन पर न्यायालय की अवमानना का आरोप

    सावनेर/नागपुर-ओबेदुल्लागंज राष्ट्रीय महामार्ग पर स्थित नागपुर-सावनेर मार्ग के दोनो तरफ सर्विस लेन पर अतिक्रमण की वजह से यहां यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।सबसे अधिक अतिक्रमण का खतरा महादुला-कोराडी बाजारपेठ परिसर में वाहन चालकों को अपनी जान हथेली में लेकर मार्ग तय करना पडता है।

    महादुला-कोराडी बाजारपेठ परिसर में फोर लेन उडानपुल निर्माण का कार्य शुरु है। दो साल पूर्व राज्यमार्ग प्राधिकरण और पुलिस-प्रशासन ने कोराडी पुलिस थाना मे बैठक आयोजित कर सर्विस लेन के दोनो तरफ अतिक्रमण हटाने के लिये व्यापारियों को हिदायत दी थी।परंतु लालफीताशाही के चलते टाल-मटोल रबैया अपनाया गया।

    ज्ञात हो कि विगत 24 व 25 जनवरी 2011 को मुंबई उच्चन्यायालय नागपुर खंडपीठ के आदेश पर महादुला-कोराडी बाजारपेठ परिसर का अतिक्रमण हटाया गया था।इस प्रकरण में याचिकाकर्ता श्री मोहन कारेमोरे बताते हैं कि अतिक्रमण हटाने के कुछ महीने पश्चात् स्थानीय पुलिस-प्रशासन की छत्रछाया में सर्विस लेन के दोनो तरफ व्यापारियों ने पुनः अतिक्रमण कर लिया गया।

    इस सबंध में जिले के तत्कालीन पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और वर्तमान पालक मंत्री नितिन राऊत और ग्रह मंत्री अनिल देशमुख को भी मालुम है कि इस मामले मे उच्चन्यायालय के आदेशों का सरासर उलंघन हुआ है।परंतु अतिक्रमण करने वाले दोषी व्यापारियों पर अतिक्रमण उन्मूलन कार्यवाई करने मे जिला प्रशासन व पुलिस-प्रशासन आनाकानी क्यों कर रहा है यह समझ से परे है।


    राष्ट्रीय राज्यं मार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों की माने तो नैशनल हाईवे ने सड़क सीमा पर निशान लगाये गये थे तथा अतिक्रमण धारकों को छोडकर अधिकृत मकान व दुकान धारकों का मुआवजा राशि जिलाधिकारी कार्यालय मे जमा किया जा चुका है। परंतु अभि तक प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। बताते है कि यहां वोट-बैंक की राजनीति को लेकर अतिक्रमण हटाने मे भेद-भाव की राजनीति जमकर खेली जा रही है।

    इस सबंध में भूतल सडक परिवहन मंत्री नितिन को भी भलीभांति मालुम हैं कि अतिक्रमण की वजह से यहां यातायात व्यवस्था चरमराई सी रहती है और यहां किसी भी क्षण सडक दुर्घटना में निर्दोष लोगों की जानहानी और आर्थिक हानी हो सकती है।इतना ही नही सडक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तिे के दर्द की वेदना(पीडा) क्या और कैसी होती है यह भी भलीभांति सभी लोग जानते हैं। परंतु अभि तक प्रशासन द्वारा अतिक्रमण उन्मूलन कार्यवाई करने उदाशीनता संदेहास्पद मानी जा रही है?

    याचिकाकर्ता के मुताबिक पुलिस-प्रशासन एवं ज़िला प्रशासन ने जल्द इस संबंध मे आवश्यक कार्यवाई नही की तो उच्चन्यायालय नागपुर खंडपीठ मे पुनः अतिक्रमण के खिलाफ पुनः “जनहित संशोधन याचिका” दायर की जायेगी और इस अतिक्रमण से होने वाली प्राणहीन और आर्थिक हानी के जिम्मेदार और जबावदार संबंधित विभाग के अधिकारी और पदाधिकारी होंगे।

    याचिकाकर्ता ने रविवार को मौका ये बारदात स्वयं सडक परिसर का निरीक्षण किया तो पाया गया कि यहां यातायात व्यवस्था चरमरा सी गयीं हैं।सबसे अधिक अतिक्रमण का खतरा महादुला-कोराडी बाजारपेठ परिसर में वाहन संचालकों को काफी परेशानियों का सामना करते हुए अपना मार्ग तय करना पड रहा है। इतना ही नहीं रविवारीय बाजार के दिन धक्क-मुक्की के बीच ग्राहक नागरिकों को बाजार मे सामान खरीदने आना जाना पड रहा है?जो कि जान जोखिम मे डालना खतरे से कम नहीं हैं। सबसे अधिक जोखिम महिलाओं को उठाना पडता है*

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