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    Published On : Thu, Dec 24th, 2020

    वेकोलि के नए CMD के लिए कामचोर कर्मी ही बड़ी चुनौती

    नागपुर: कोल् इंडिया की अग्रणी उत्पादन कंपनी जिसे WESTERN COALFIELDS LIMITED के नाम से जाना जाता हैं.जिसकी विदर्भ और मध्यप्रदेश में भूमिगत और खुली खदानें हैं.अमूमन सभी खदानों में लगभग 1 दर्जन से अधिक कर्मी फांकीबाज या कामचोर हैं, जिन्हें SUB AREA MANAGER और उनसे भी वरिष्ठों का समर्थन हासिल हैं.इनमें से कुछ वेकोलि में अधिकृत कामगार संगठनों का पद हासिल कर सिर्फ हज़ारी लगा रहे और वेकोलि से मासिक वेतन सह अन्य सभी सुविधाओं का मुफ्त में मजा ले रहे.

    वेकोलि की आज की स्थिति पहले जैसे नहीं रही,वेकोलि को अपनी अस्मिता कायम रखने के लिए अल्प खर्च में गुणवत्ता उत्पादन देने की नौबत से जूझ रही.पिछले CMD ने तो खदानों से निकलने वाली रेत और पानी को भी बेचने का योजना की घोषणा की थी लेकिन कागजों तक सिमित रह गई.

    कामचोर कर्मियों का काफिला वेकोलि खदान से लेकर मुख्यालय तक पहुँच चूका हैं.तभी तो CVO का महत्त्व WCL (वेकोलि) में घट गया हैं.पिछले 5 सालों में CVO के समक्ष आए मामलों पर समीक्षा करने पर इसका आभास हो सकता हैं,इसके अलावा CBI के निर्देशों का भी CVO ने सख्ती से पालन करने के बजाय समझौते को महत्त्व देती रही हैं.पिछले एक दशक से CVO और CMD के मध्य तालुकात मधुर रहने के कारण CVO कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर पाया।

    उक्त कामचोर कर्मियों से काम लेना नए CMD के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही हैं.

    दुर्घटनाओं को आमंत्रण देती खदानों के मकानें

    अमूमन बंद और शुरू खदानों में रहवासी वेकोलि कर्मियों के मकानें जर्जर से अधिक दुर्घटना ग्रस्त हो चुकी हैं.बंद खदानों के ऐसे मकानों पर वेकोलि ने मरम्मत खर्च करना बंद कर दिया,साथ में सभी रहवासियों को मकानें खाली करने का नोटिस देने के बावजूद कोई टस से मस नहीं हो रहा.कल रात बंद वलनी खदान के दो मंजिल मकान के पहले मंजिल की सुरक्षा दीवार ढह गई.ऐसे में जान-माल का नुकसान होने पर वेकोलि से ही हर्जाना की मांग होगी।ऐसी हालात से जूझ रही खदानों के मकानें अविलम्ब खाली करवाने की मांग ‘एमओडीआई फाउंडेशन’ ने की हैं.

    क्या वेकोलि की माइंस सेफ्टी समिति डमी हैं

    जिन खदानों में उत्पादन शुरू हैं,उन खदानों के भी मकानें जर्जर हो चुकी हैं,न वेकोलि ध्यान दे रही और न ही रहवासी।मुफ्त के चक्कर में सभी जान जोखिम पर जीवन गुजर बसर कर रहे.कन्हान के निकट कोयला खदानों के रहवासी कॉलोनी के एक-एक ईमारत पर एक-एक परिवार का कब्ज़ा हैं,इनमें से एक वेकोलि कर्मी तो शेष बाहरी,वेकोलि के सर्व सुविधा का मजा लेते हुए वेकोलि को चुना लगा रहे,यहीं आलम अन्य खदानों का हैं,काम किसी अन्य खदान में और रहते किसी अन्य खदान में.इनसे मकान खाली करवाना नए CMD के लिए दूसरी बड़ी चुनौती,क्या वेकोलि की माइंस सेफ्टी समिति डमी हैं ?

    अवैध मकानों का मकड़जाल

    वेकोलि के बंद खदान व शुरू खदान परिसर में वेकोलि के अधिकृत कच्चे-पक्के-जर्जर मकानों के अलावा प्रत्येक खदानों में अनगिनत अवैध मकानें अस्तित्व में हैं,जिन्हें स्थानीय अधिकारी और तथाकथित स्थानीय यूनियन नेताओं का वरदहस्त प्राप्त हैं.इन अवैध मकानों का लाभार्थी कौन ? जबकि खदान शुरू करने के पूर्व वेकोलि सम्पूर्ण जमीन अधिग्रहण कर संबंधितों को मुआवजा सह नौकरी देती आ रही.

    मुख्यालय से खदान तक नहीं पहुँचते आला अधिकारी

    मुख्यालय में अमूमन सभी सम्बंधित विभागों के आला अधिकारी तैनात हैं,ये शुरुआत से लेकर सेवानिवृत्त होने तक कार्यालयीन बाबू की भूमिका में रहते हैं.अपने अधीनस्त खदान क्षेत्रों का नियमित दौरान नहीं करते नतीजा AREA OFFICE अपनी मनमर्जी के लिए हमेशा से स्वतंत्र रहा.नए CMD के लिए यह भी बड़ी चुनौती रहेंगी,अगर उन्हें कुछ उल्लेखनीय कर गुजरना हो तो.

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