| | Contact: 8407908145 |
    Published On : Wed, Dec 9th, 2020
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    CFC : ठेकेदार मुक्त करने में आनाकानी कर रही स्थाई समिति

    – ठेकेदार की मनमानी से वर्षों किया गया ऑपरेटरों का शोषण,कार्यकाल के अंत में पिछले कुछ वर्षों से 2800 रुपए/ऑपरेटर/माह कमा रहा था,जिस पर लगाम लगाने के लिए तत्कालीन मनपायुक्त तुकाराम मुंढे ने ठेकेदार मुक्त कर मनपा के खर्च बचाने के लिए अपने कार्यकाल में प्रस्ताव भेजा था लेकिन तब से स्थाई समिति में उक्त प्रस्ताव धूल खा रही और समिति की दूरदर्शिता पर उंगलियां उठना शुरू हो गया

    नागपुर – मनपा में नई व सीधी भर्ती लगभग 3 दशक से बंद हैं। कार्यरत कर्मियों की जगह भरपाई के लिए एक सोची समझी रणनीत की तर्ज पर ‘CFC’ के तहत एक विवादास्पद ठेकेदार को कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध करवाने जिम्मा दिया गया। इस ठेकेदार ने शुरुआत में मनमानी शोषण किया।पिछले कुछ वर्षों से 2800 रुपए/ऑपरेटर/माह कमा रहा।तात्कालीन मनपायुक्त तुकाराम मुंढे की वक्रदृष्टि पड़ी तो ठेकेदार को निपटाने की योजना बनाई गई।मामले को अंतिम रूप देकर ठेकेदार मुक्त CFC करने और ठेकेदार को मिल रहा मुनाफा का बचत करने के लिए मुंढे ने उक्त प्रस्ताव स्थाई समिति को भेजा लेकिन स्थाई समिति की दूरदर्शिता का आभाव के कारण अबतक कई समिति की बैठक हो चुकी लेकिन इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगाई गई.प्रशासन का आरोप हैं कि सत्तापक्ष इस मामले में अड़ंगा डाल,मनपा का नुकसान कर रहा.

    ‘CFC’ के तहत मनपा को कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध करवाने का ठेका ठेकेदार को मिलीभगत के तहत ठेका दिया गया था,तब 5 दर्जन से कुछ अधिक ऑपरेटर उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव को नियमों में ढाल कर ठेका दिया गया था,शुरुआत में ठेकेदार ने ऑपरेटरों का मनमानी आर्थिक शोषण किया करता था। आधे से अधिक पेमेंट हजम कर लिया जाता था। न PF भरी जाती थी और न ही MEDICAL सुविधा के रूप में ESIC का पंजीयन कर्मियों सह उनके पारिवारिक सदस्यों का करवाया गया था। इसके नाम पर ठेकेदार ऑपरेटरों से वेतन काट जरूर लेते थे।

    दिनों दिन मनपा में सेवानिवृति बढ़ते गई और कर्मियों की कमी होती गई.इनकी भरपाई या तो एवजदारों या फिर ‘CFC’ के ऑपरेटरों से की जाती रही.इस चक्कर में पूर्व महापौर सह कई सफेदपोशों और पूर्व के आयुक्तों ने भी अपने-अपने करीबियों के परिजनों को ‘CFC’ के तहत ऑपरेटर बनवाकर आर्थिक लाभ उठाते देखें गए.आज की सूरत में 184 से अधिक ऑपरेटर मनपा के विभिन्न विभागों कागजों पर तैनात हैं.

    जुगाड़ू ऑपरेटर मनपा को चुना लगा रहे
    ‘CFC’ के तहत तथाकथित 184 ऑपरेटरों में से आधे सही मायने में मनपा को अमूल्य सेवाएं दे रहे,शेष आधे जुगाड़ू ऑपरेटर मनपा को आर्थिक चुना लगा रहे.इसमें से कई दर्जन ऐसे भी ऑपरेटर हैं जो सिर्फ सहल करने और फैशन परेड करते अन्यत्र विभागों में घंटों ‘TIME PASS’ करते दिख जाएंगे।कुछ ऑपरेटर ऐसे भी हैं जिनके शौक का खर्चा मासिक वेतन से निकल रहा,आते हैं कारों से.दरअसल मनपा प्रशासन ने कभी ऑपरेटरों की जरुरत मामले पर कभी समीक्षा नहीं की.कि होती तो मनपा को भी प्रत्येक माह लाखों का बचत हो रहा होता।

    उक्त ठेकेदार का मनपा के साथ हुआ करार समाप्ति हो चूका हैं,इसलिए मनपा प्रशासन के निर्देश पर आर्थिक बचत के मद्देनज़र ठेकेदार को हटाने और उनके ऑपरेटरों को कायम रखने का निर्णय लिया गया.ठेकेदार को हटाने से मनपा प्रशासन का मासिक 5से 6 लाख रूपए का बचत होंगा।

    वहीं दूसरी ओर ऑपरेटरों की नई सिरे से भर्ती की जाएंगी,नए ऑपरेटरों को 15000 मासिक वेतन दिया जाएगा अर्थात ऑपरेटरों के मासिक वेतन में से कुल 8300 के लगभग कटौती की जाएंगी।इससे मनपा का 15,25,000 मासिक बचत होंगा अर्थात मनपा प्रशासन को ठेकेदार हटाने से 20,25,000 रूपए का मासिक बचत होंगा। इस नई आर्थिक व्यवस्था को स्वीकार करने वाले ऑपरेटर ही मनपा में टिक पाएंगे।

    उल्लेखनीय यह हैं कि मनपा में ठेकेदार कायम रहने के लिए अबतकक सफल रहा और मनपा में टेंडर समाप्त होने के बाद भी मनपा में लाखों का लाभ उठा रहा.

    उक्त प्रस्ताव सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कर स्थाई समिति तक पहुँच गई हैं,लेकिन लगभग 6 माह से मामला/प्रस्ताव स्थाई समिति में धूल खा रहा,कल १० दिसंबर 2020 को भी स्थाई समिति की बैठक हैं,लेकिन इसकी विषय पत्रिका में भी मनपा हित में उक्त प्रस्ताव को स्थान नहीं दिया गया.बताया जा रहा कि स्थाई समिति में विषयों का चयन बाहरी प्रभावी नगरसेवक और उनके OSD करते हैं.जबतक इनका समझौता नहीं होता तब तक मनपा को यूँ ही चुना लगता रहेंगा।

    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145