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    Published On : Fri, Dec 11th, 2020

    ‘बॅन गंगा-जमुना’ मुहिम: गंगा जमूना बस्ती से आठ नाबालिक लड़कियों को छुड़ाया, नागपूर पुलीस ने किये कारवाई का हुआ स्वागत

    नागपूर: इतवारी इलाके मे रह रहे नागरिकों के सपोर्ट से ‘बॅन गंगा-जमुना’ मुहिम चलायी जा रही है. इस मुहिम के अंतर्गत गंगा जमूना बस्तीत मे चोरी-छुपे चल देह व्यवसाय को रोखने के लिये समय समय पर पुलीस विभाग से विनंती की जाती है. इस बीच कल गुरुवार, दिनांक १० दिसंबर को नागपूर पुलीसद्वारा की गयी कारवाई मे गंगा जमूना बस्ती से आठ नाबालिक लंडकियों को रिहा किया गया. इस कारवाई का ‘बॅन गंगा-जमुना’ मुहिम मे सक्रिय सदस्य और स्थानिय नागरिकों ने स्वागत किया है. इसके पहले भी यहा कई बार नियमो का उल्लंघन होता दिख रहा था. इतना ही नही तो इस इलाके से नाबालिक लंडकियों की खरीदी बिक्री भी होती रही है, जीसपर अबतक पुरी तरह रोख नहीं लगी है.

    श्री गजानन राजमाने, डीसीपी (गुन्हे शाखा) और श्री लोहित मतानी, झोनल डीसीपी इनके नेतृत्व मे की गई कल के कारवाई मे पुलीस ने १२९ लोगो को गिरफ्तार किया. इसके पहले ऑक्टोबर महिने मे हुई कारवाईयों मे अन्य जिलो से गंगा जमूना बस्ती मे लाई गयी १४ लंडकियो को मुक्त किया गया था.

    राष्ट्रीय गुन्हे रेकॉर्ड ब्युरो के रिपार्ट अनुसार महिला अत्याचार के मामले मे नागपूर देश मे सातवे स्थान पर है. राष्ट्रीय गुन्हे रेकॉर्ड ब्युरो के आकडो के अनुसार अन्य राज्यो मे हर रोज १०५ महिलाये लापता हो रही है. वही महाराष्ट्र के आकडो पर नजर डाले तो यहा हर सप्ताह १७ महिलाओ की तस्करी हो रही है. पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) पीड़ित लंडकियो मे ४७% लंडकिया यौन शोषण और ४८% लंडकिया बलात्कार जैसे घिनोने अपराध का शिकार हो रही है.

    सुनील गोटाफोडे, सामाजिक कार्यकर्ता: पुलीस विभागद्वारा की गयी इस कारवाई का हम स्वागत करते है. रेड लाईट एरिया होने से यहा चल रहे देह व्यवसाय और इससे संबंधीत गुनाहो के रोकथाम के लिये हम पिछले कई साल से प्रयास कर रहे है. शहर मे होने वाली घटनाये विशेषत: महिलाओं पर अत्याचार के मामलो मे यह प्रमुख केंद्र बन रहा है. इसके पहले भी पुलीस ने यहा कई बार छापा मार कारवाई की है. इसमे पुलीस विभाग को हर बार सफलता हात लगी है. इसके लिये हम पुलीस विभाग की सरहाना करते है.

    भूमिका गोटाफोडे, सामाजिक कार्यकर्ता: हमे डर है की कोरोना काल मे देह व्यवसाय मे लंडकियो और महिलाओ को ढकेला जा सकता है. गरिबी और बेरोजगारी के चलते विदर्भ के लंडकियो और महिलाओ को यहा लाया जा सकता है. ऐसे मे शहर की महिलाये असुरक्षित है ऐसा समजना गलत नही होगा. इसलीये तस्करी व अन्य मामलो पर रोक लगाने के लिये रेड-लाइट क्षेत्र व अन्य केंद्र मे महिलाओ के शोषण को रोकने की मांग हम करते है. देह व्यवसाय से संबंधित लंडकियो को रिहा करने के बाद उनका आगे क्या? इस पर मेरा सुझाव है की उन्हे समाज के मुख्य धारा मे लाने के लिये आम नागरिको कों सहकार्य करना होगा. ऐसे लंडकियो के पुनर्वसन के लिये आवश्यक कदम उठाने जरुरी होंगे

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