Published On : Thu, Dec 7th, 2017

शशि कपूर क्‍यों लिपटे थे तिरंगे में ? जानें भारत में किन्‍हें मिलता है राजकीय सम्‍मान किन्‍हें मिलता है राजकीय सम्‍मान

मुंबई: बॉलीवुड एक्‍टर शशि कपूर का 79 साल की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। मंगलवार को उन्‍हें राजकीय सम्‍मान के साथ विदा किया गया। शशि कपूर का शव तिरंगे में लिपटा था। आइए जानें उन्‍हें यह सम्‍मान क्‍यों दिया गया और भारत में किन लोगों को मिलता है राजकीय सम्‍मान… इसलिए शशि कपूर […]

Shashi Kapoor, tricolor
मुंबई: बॉलीवुड एक्‍टर शशि कपूर का 79 साल की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। मंगलवार को उन्‍हें राजकीय सम्‍मान के साथ विदा किया गया। शशि कपूर का शव तिरंगे में लिपटा था। आइए जानें उन्‍हें यह सम्‍मान क्‍यों दिया गया और भारत में किन लोगों को मिलता है राजकीय सम्‍मान…

इसलिए शशि कपूर को मिला था राजकीय सम्‍मान
दिग्गज अभिनेता-फिल्मकार शशि कपूर का मंगलवार को सांताक्रूज हिंदू श्मसान में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके शव को तिरंगे में लपेट कर लाया गया और पुलिस ने उन्हें तीन बंदूक की सलामी दी। कई लोगों को लगा कि शशि न तो नेता रहे, न कभी मुख्‍यमंत्री या प्रधानमंत्री फिर उनके शव को तिरंगे से क्‍यों लपेटा गया। दरअसल शशि कपूर को पद्म भूषण मिला था, ऐसे में उन्‍हें राजकीय सम्‍मान दिया गया।

किन्‍हें मिलता है राजकीय सम्‍मान
भारत में राजकीय सम्‍मान वर्तमान और पूर्व राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्‍यमंत्रियों को दिया जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार चाहे तो किसी भी शख्‍स को यह सम्‍मान देने का आदेश दे सकती है। बाद में इस नियम में बदलाव किया गया और अब केंद्र सरकार के अलावा राज्‍य सरकार को भी यह अधिकार मिला है कि वह देश के किसी भी सम्‍मानित नागरिक को राजकीय सम्‍मान दिला सकती है।

सम्‍मान देने की यह है प्रक्रिया
राजनीति, साहित्‍य, कानून, साइंस और कला के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण योगदान देने वाले शख्‍स को राजकीय सम्‍मान दिया जा सकता है। इसके अलावा देश के नागरिक सम्‍मान (भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण) पाने वाले व्‍यक्‍ित भी इस सम्‍मान के हकदार हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए केंद्र या राज्‍य सरकार को सिफारिश करनी पड़ेगी। राज्‍य का मुख्‍यमंत्री अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श करके ही किसी व्‍यक्‍ित को राजकीय सम्‍मान देने की बात कह सकता है। एक बार निर्णय ले लिया जाए, तो यह आदेश राज्‍य के डीजीपी और पुलिस कमिश्‍नर तक पहुंचा दिया जाता है ताकि अंतिम विदाई के वक्‍त राजकीय सम्‍मान की सारी तैयारी की जा सके।

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Sunita Mudaliar - Executive Editor
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