Published On : Sat, Nov 18th, 2017

ये ‘पद्मावती’ की ‘नाक’ का सवाल है! सेंसर बोर्ड ने यह विवादित फ़िल्म निर्माता को लौटा दी है!


नागपुर: ऐतिहासिक या पौराणिक पात्रों पर कोई फिल्म बने… और उस पर विवाद या बवाल-बखेड़ा खड़ा न हो, ऐसा भारत में कभी हो नहीं सकता! चित्तौड़गढ़ के महाराजा रतन सिंह की रूपवती पत्नी पद्मावती पर संजय लीला भंसाली ने इसी नाम पर जो फिल्म बनाई है, वह अब घोर विवादों में घिर गई है. राजपूतों और क्षत्रियों के अनेक संगठनों-समूहों को इस फिल्म के कुछ काल्पनिक दृश्यों, आततायी खिलजी और रानी पद्मावती के अदृश्य प्रेम तथा महारानी के नृत्य-सीन पर आपत्ति है. ऐतिहासिक कथाओं-पात्रों से छेड़छाड़ कर अपनी कल्पनाओं को सिर्फ मनोरंजन और धनार्जन के लिए फिल्माना गलत है. यह समाज के एक बड़े हिस्से को आक्रोशित और दुखी कर देता है. भंसाली एंड मंडली ने यही किया है. इसका हर स्तर पर विरोध हो रहा है, लेकिन इस फिल्मी विवाद ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं.

भारत में लोकतंत्र है, जहां अभिव्यक्ति की आजादी सबको प्राप्त है. इसका यह मतलब नहीं कि इस आजादी के नाम पर कुछ भी दिखाया-बोला या परोसा जाए! राजस्थान की आन-बान और शान कहलाने वाली रानी, बल्कि देवी पद्मावती का फिल्मी रूपांतरण अगर सार्थक होता, तो संभवत: विवाद इतना न बढ़ता! मगर देश भर में खास कर उत्तर-पश्चिम भारत में इसे लेकर जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं या धरने-धमकियां दी जा रही हैं, वे भी समझ से परे हैं. आखिर विरोधियों को यह कैसे पता चला कि इस फिल्म में *पद्मावती* को घूमर या नृत्य करते अथवा खिलजी के सामने नजरें मटकाते दिखाया गया है? साल भर पहले ही राजस्थान में फ़िल्म का सेट भी ‘करनी सेना’ ने जला दिया था! तब तो फिल्म का निर्माण ही शुरू हुआ था. मतलब साफ है कि इस फिल्म के निर्माता प्रारंभ से ही इसे विवादास्पद बनाना चाहते थे, ताकि उसकी जम कर पब्लिसिटी हो सके. शक है कि फिल्मकारों ने ही विरोधियों के लिए फ़िल्म के कुछ फुटेज ‘लीक’ कराए हो, ताकि खूब बवाल मचे…. और जब फिल्म रिलीज हो, तो दर्शक ‘बॉक्स ऑफिस’ के सारे रिकॉर्ड तोड़ दे!

माना कि क्षत्रियों और राजपूतों के लिए यह फिल्म अब ‘पद्मावती की नाक का सवाल’ बन चुकी है, किंतु इसका विरोध करते-करते महिला सम्मान को ताक पर रख देना कहां तक जायज है? पद्मावती की भूमिका निभा रही अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को ‘करणी सेना’ के एक नेता द्वारा ‘नाक काटने की धमकी’ देने का क्या औचित्य है? निर्देशक भंसाली का सिर काटकर लाने वाले को 5 करोड़ का इनाम घोषित करना क्या किसी आतंकवाद से कम है? यह लोकतंत्र है भाई, जहां धमकी नहीं, सिर्फ कानून का राज चलता है! नारी जाति की मान-मर्यादा को ताक पर रख, सिर्फ सस्ती पब्लिसिटी के लिए दीपिका पादुकोण की ‘नाक काटने’ वाला बयान न केवल निंदनीय, बल्कि अनैतिक भी है! किसी भी धर्म की कोई भी महिला की रक्षा करना तो हर क्षत्रिय-राजपूत सहित हर धर्मीय भारतवासी का धर्म है, कर्तव्य है. ‘करनी सेना’ के नेता की ऐसी गीदड़ भभकियों को यह देश कैसे बर्दाश्त कर सकता है?

हो सकता है कि आवेश और आक्रोश की ‘रौ’ में बह कर ऐसी अनर्गल धमकी दी गयी हो. फिर यह भी हो भी हो सकता है कि फिल्म निर्माता निर्देशक से ‘कुछ पाने’ की आस में उक्त नेता ने अपना ‘मुंह खोला’ हो, ताकि उसे समय रहते बंद कराया जा सके! वैसे भी शिवसेना हो, मनसेना हो…. या करनी सेना…! धमकी देकर अपना ‘उल्लू सीधा करना’… ही इनका असली चरित्र है! याद करें, पिछले वर्ष ही करण जौहर की फिल्म ‘ये दिल है मुश्किल’ को लेकर मनसेना ने कितना बवाल मचाया था, क्योंकि उसमें पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान भी था. तब उरी और पठानकोट में पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला कर हमारे बीसियों जवानों को शहीद कर दिया था. तब मनसेना नेता ने उरी शहीदों के लिए पांच करोड़ का ‘दान’ दिला कर ही वह फ़िल्म रिलीज होने दी थी! ऐसा ही विरोध शिवसेना ने फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ के प्रदर्शन के दौरान किया था. शाहरुख की फिल्म ‘रईस’ का विरोध भी पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान की वजह से किया गया था. मतलब यह कि अभिव्यक्ति और विरोध की स्वतंत्रता के नाम पर इस देश में लोकतंत्र का मखौल उड़ाया जा रहा है. अब यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी प्रवृतियों पर तत्काल लगाम लगाए. वैसे पद्मावती की नाक बचाने ही सेंसर बोर्ड ने यह विवादित फ़िल्म निर्माता को लौटा दी है!

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Sunita Mudaliar - Executive Editor
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