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मनपा बस चालक शीतकालीन अधिवेशन के पहले दिन करेंगे हड़ताल!

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नागपुर: नागपुर के नागरिकों की बहुमुखी प्रतिभा की जगभर में अपनी अलग पहचान है, स्थानियों लोगों ने कई रिकॉर्ड बनाए. इस बार मनपा के बस चालकों ने शीतकालीन अधिवेशन में आगंतुकों के स्वागत के लिए पहले दिन बस संचलन बंद रखने का निर्णय लिया है. इसके पीछे की हक़ीक़त यह है कि मनपा प्रशासन ने उनकी वेतन निधि रोक बस ऑपरेटरों को सकते में ला खड़ा किया है. समय रहते उक्त मसले का निराकरण नहीं हुआ तो सरकार की फजीहत होनी तय है.

बस चालकों के अनुसार मनपा परिवहन विभाग शुरुआत से नियमों की अवहेलना कर मामूली मासिक वेतन बस ऑपरेटरों के मार्फ़त दे रहा है. आवाज उठाई गई तो विभाग के साथ डिम्ट्स नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी देते हैं. नवंबर माह का वेतन ८ दिसंबर को तय नियमावली के तहत दिया जाना चाहिए. लेकिन निष्क्रिय परिवहन विभाग और लापरवाह प्रशासन सिर्फ खुद की पीठ थपथपाने के लिए ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ चलाने का श्रेय लेना चाहता है और जब वेतन, बकाया देने की बात आती तो हाथ खड़े कर नाना प्रकार के आरोप मढ़ कर्मचारियों को चुप रखने में अब तक सफल रहे. आगामी सोमवार ११ दिसंबर के पूर्व मनपा प्रशासन ने वेतन, बकाया भुगतान नहीं किया तो सभी बस चालक एकजुट होकर बसें तब तक के लिए खड़ी कर रखेंगे जब तक वेतन, बकाया नहीं दिया जाता.

हड़ताल से अधिवेशन में आवाजाही करने वालों को काफी राहत मिलेगी. सभी मार्ग लोकल, बाहरी निजी वाहनों को मिनट-मिनट में होने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा. इस दौरान निजी सवारी वाहनों को रोजगार भी मिलेगा.

वैसे भी मनपा से ज्यादा डिम्ट्स की मनमानी काफी बढ़ गई है. लगभग शनिवार, रविवार को ७५-८० बसों को बंद कर उनके चालकों पर कहर ढहाने का सिलसिला जारी है. मनपा प्रशासन भी अब वंश की तर्ज पर लाभ के मार्ग पर बसों को दौड़ने के लिए दबाव बना रही है. यह ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ की संकल्पना के खिलाफ पहल कहलायेगी.

मनपा वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार पूर्व मनपायुक्त के कार्यकाल में परिवहन विभाग के ठेकेदारों के लिए ‘स्क्रो अकाउंट’ खोलने की सारी प्रक्रिया पूरी होने के साथ पर्याप्त राशि खजाने में होने के बाद भी प्रशासन ने नहीं खोला. ‘स्क्रो अकाउंट’ से होने वाले लाभ के एवज में मनपा ने परिवहन विभाग के बस ऑपरेटरों से मनपा हित में जो भी उठाना था, उठा तो लिया लेकिन खाता नहीं खोलने से आये दिन कंडक्टर, चालक और बस ऑपरेटर मनपा मुख्यालय में रोजमर्रा के कामकाज को बाधित कर दर-दर भटकते देखे जा सकते हैं.

आयुक्तालय के सूत्रों के अनुसार मनपा प्रशासन ने बस ऑपरेटरों से उनकी आर्थिक हैसियत करोड़ों में पेश करने के निर्देश दिए तो दूसरी ओर उन ऑपरेटरों ने मनपा को अपनी आर्थिक हैसियत से काफी ज्यादा का ‘क्रेडिट’ दे रखा है.

उल्लेखनीय यह है कि मनपा की नीति में सुधार नहीं हुआ तो सोमवार को अधिवेशन के पहले दिन बस चालकों की अनोखे पहल से होने वाले नफा-नुकसान का नज़ारा देखने को मिल सकता है. इस पहल को असफल करने के लिए मनपा प्रशासन का रुख भी देखने लायक रहेगा.